
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर danger zone में पहुंचता दिख रहा है। समुद्र में ईरान को सैन्य रूप से घेरने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ शब्दों में कहा है— या तो Iran Nuclear Deal के लिए टेबल पर आओ, या फिर पहले से ज्यादा खतरनाक हमला झेलने के लिए तैयार रहो।
ट्रंप की यह चेतावनी सीधे-सीधे pressure diplomacy का संकेत मानी जा रही है।
ट्रंप की धमकी: Deal या Destruction
सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप ने लिखा कि उन्हें उम्मीद है ईरान जल्द बातचीत की मेज पर आएगा और “No Nuclear Weapon” अमेरिका की non-negotiable condition होगी।
हालांकि, यह संदेश जितना diplomatic दिखा, उतना ही war warning भी माना जा रहा है।
ईरान का करारा जवाब: सम्मान चाहिए, दबाव नहीं
ट्रंप की धमकी पर ईरान ने भी no-nonsense reply दिया है। ईरान की ओर से साफ कहा गया कि बातचीत संभव है लेकिन सम्मान और भलाई की भावना के साथ। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा: “हमारी सेना ट्रिगर पर उंगली रखे है, लेकिन हम डील के खिलाफ नहीं हैं.”
ईरान ने चेतावनी दी कि अगर जबरदस्ती या सैन्य दबाव डाला गया, तो जवाब ऐसा होगा “जैसा दुनिया ने आज तक नहीं देखा होगा.”
बातचीत से समाधान के संकेत
तनाव के बीच राहत की बात यह है कि backdoor diplomacy जारी है। मंगलवार को ट्रंप ने संकेत दिए कि बातचीत से समाधान निकल सकता है। दिलचस्प बात यह है कि ईरान की ओर से भी वही शब्द दोहराए गए— “No Nuclear Weapon”, लेकिन अपने तरीके से।

अमेरिका की 3 सख्त शर्तें
New York Times के मुताबिक, यूरोपीय देशों की मध्यस्थता में बातचीत चल रही है। अमेरिका ने संभावित सैन्य कार्रवाई रोकने के बदले ईरान के सामने तीन शर्तें रखी हैं, ईरान में यूरेनियम संवर्धन का स्थायी अंत। IRGC की लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता पर रोक। Middle East में ईरान के proxy groups— Hamas, Houthi और Hezbollah—का समर्थन खत्म करना।
फिलहाल ईरान इन शर्तों के लिए तैयार नहीं है, लेकिन talks still on हैं।
चीन की एंट्री: अमेरिका को कड़ी नसीहत
ट्रंप की धमकियों के बीच China ने भी खुलकर मोर्चा लिया है। UN Security Council की बैठक में चीन के राजदूत Fu Cong ने कहा: “बल प्रयोग समाधान नहीं है. Middle East में सैन्य दुस्साहस पूरे क्षेत्र को अनिश्चितता में झोंक देगा.”
चीन ने अमेरिका को UN Charter का पालन करने की सलाह दी। रूस के बाद चीन दूसरा UNSC सदस्य है जो खुलकर ईरान के साथ खड़ा दिखा।
असली सवाल क्या है?
एक तरफ “No Nuclear Weapon” की बात, दूसरी तरफ aircraft carriers और missile deployments। सवाल यह नहीं कि कौन सही है, सवाल यह है कि क्या gunpoint diplomacy से सच में शांति आती है?
US-Iran तनाव अब सिर्फ nuclear deal नहीं रहा, यह global power balance, Middle East stability और UNSC credibility की परीक्षा बन चुका है। आने वाले दिन तय करेंगे— बातचीत जीतेगी या बारूद?
